| بــــــر ســــــردر كاروانــــــسرايي | تــــصوير زنــــي بــــه گــــچ كــــشيدند |
| اربــــاب عمــــايم ايــــن خبــــر را | از مخبـــــــر صـــــــادقي شـــــــنيدند |
| گفتنـــد كـــه وا شـــريعتا، خلـــق | روي زن بـــــــينقـــــــاب ديدنـــــــد |
| آســــيمه ســــر از درون مــــسجد | تـــــا ســـــر در آن ســـــرا دويدنـــــد |
| ايمــان و امــان بــه ســرعت بــرق | مـــيرفـــت كـــه مـــؤمنين رســـيدند |
| ايــن آب آورد، آن يكــي خــاك | يـــك پيچـــه ز گــــِـل بـــر او بريدنـــد |
| نــــاموس بــــه بــــاد رفتــــهاي را | بــا يــك دو ســه مــشت گـــِـل خريدنــد |
| چون شرع نبي از اين خطـر رسـت | رفتنـــــد و بـــــه خانـــــه آرميدنـــــد |
| غفلـت شــده بــود و خلــق وحــشي | چـــون شـــير درنـــده مـــي جهيدنـــد |
| بـــــي پيچـــــه زن گـــــشاده رو را | پـــــاچين عفـــــاف مـــــي دريدنـــــد |
| لــبهــاي قــشنگ خوشــگلش را | ماننــــــد نبــــــات مــــــي مكيدنــــــد |
| بالجملــــه تمــــام مــــردم شــــهر | در بحــــــر گنــــــاه مــــــي تپيدنــــــد |
| درهــاي بهـــشت بــسته مـــيشـــد | مــــــردم همــــــه مــــــي جهنميدنــــــد |
| مــــيگــــشت قيامــــت آشــــكارا | يكبــــاره بــــه صــــور مــــي دميدنــــد |
| طير از وكـرات و وحـش از جحـر | انجــــــم ز ســــــپهر مــــــي رميدنــــــد |
| اين اسـت كـه پـيش خـالق و خلـق | طـــــــلاب علـــــــوم رو ســـــــفيدند |
| بــــا ايــــن علمــــا هنــــوز مــــردم | از رونــــــق ملــــــك نــــــا اميدنــــــد |